क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि बिस्तर पर लेटते ही मोबाइल हाथ में आ जाता है?
और देखते-देखते एक घंटा कब निकल जाता है, पता ही नहीं चलता।
आज के समय में यह आदत आम हो चुकी है, लेकिन इसके असर बेहद गंभीर हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, रात में मोबाइल फोन का ज़्यादा इस्तेमाल सीधे तौर पर नींद की गुणवत्ता को खराब करता है।
मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी (Blue Light) दिमाग को यह संकेत देती है कि अभी दिन है। इसका नतीजा यह होता है कि शरीर का नींद वाला हार्मोन सही समय पर नहीं बन पाता। धीरे-धीरे इंसान देर से सोने लगता है और सुबह उठते ही थकान महसूस करता है।
नींद पूरी न होने का असर सिर्फ थकान तक सीमित नहीं रहता। इसका संबंध चिड़चिड़ापन, तनाव, ध्यान की कमी और यहां तक कि वजन बढ़ने से भी जोड़ा जा रहा है। कई लोग बिना वजह बेचैनी और सिरदर्द की शिकायत करने लगते हैं, लेकिन असली वजह उन्हें पता ही नहीं होती।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोने से कम से कम 30–60 मिनट पहले मोबाइल फोन से दूरी बना लेनी चाहिए। यह छोटी-सी आदत आपकी नींद, मूड और दिनभर की एनर्जी को बेहतर बना सकती है।
आज की डिजिटल दुनिया में मोबाइल ज़रूरी है, लेकिन अपनी सेहत से ज्यादा नहीं।
